GANDHI

GANDHI
MAHATMA

Thursday, September 30, 2010

पीपलि लाइव और गाँधी


जब पीपलि लाइव मे मंहगाई डायन गाया गया तो पूरे देश ने उसे सराहा .............लेकिन जिस लोक कला से ये चुराया गया है..........हम उस लोककला को ही खा चुके है...... हम माने आप और मै.....................नौटंकी कला अपना अस्तित्व तलाश रही है.....छटपटा रही है..............मेरे कुछदोस्तो ने मुझसे कहा की आओ नया भारत बनाते है............ मेरा मानना है की हमे कुछ नया नही करना है.....जो पीछे छूट गया है उस भारत का हाथथामना है.........गाँधी ने लिखा भी है कि विकास कि दौड़ मे जहा रेलगाडी नही पहुचि है....वही असली भारत है.............आइए चलते है अपने साथियोको साथ लेने......

No comments:

Post a Comment