जब देश के बड़े बड़े चैनल ३० तारीख को आम जनता से शांति बनाने की अपील कर रहे थे तो बार बार एक ही चेहरे का वास्ता जनता को दिया जा रहा थाऔर वो था राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का चेहरा............................बार बार ब्रेक मे एक ही भजन ......एश्वर अल्लाह तीरो नाम सबको सन्मति देभगवान ...........देर आए मगर दुरुस्त आए........गाँधी की याद पूरे देश को आई ........गाँधी के कहे अनुसार हिन्दुस्तान अगर प्रेम के सिद्धांत कोअपने धर्म के एक सक्रिय अंश मे स्वीकार करे और उसे अपनी राजनीति मे शामिल करे तो स्वराज्य स्वर्ग से धरती परउतरेगा...................................अभी भारत को ये समझना बाकी है.....मंदिर या मस्जिद की राजनीति से हमारे युवा बाहर निकलना चाहते है ......
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