
भारत आस्थाओ और कल्पनाओ का देश कब हो गया................असलियत से दूर....या पहले से ही था.............हमने दुनिया को सिखाया और खुद भूल बैठे. हमारा आत्मविश्वास कही खो गया...............बुराई पर सच्चाई कि जीत...........आज मेले तक सिमट कर रह गई है......रावण आज तक नही मरा.....रामलीला अपना मकसद खो बैठी.....राम बनाने का संकल्प टूट गया..................जितनी भीड़ रामलीला के मैदानो मे होती है...........अगर हम कभी देश कि सम्मस्याओ के लिए इस तत्परता से जुट सकते तो माहौल कुछ और ही होता.....लेकिन हमने सीखा केवल झूठी आस्थाओ मे जीना....हमे बताया गया कि ब्रह्म सत्या है और जगत मिथ्या है.........जिंदगी को जीना भुला दिया गया . ये रावण हर साल फिर जीवित हो जाता है.
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