
कांग्रेस के मौजूदा नेता बच्चो कि तरह हरकते कर रहे है... ऐसा लग रहा है कि जैसे सब उस एक परिवार के गुलाम है और उसी का गुणगान करने मे लगे हैं जिनका उन्हे मेहनताना मिलता है. राहुल गाँधी कि तुलना जय प्रकाश नारायण से करना हमारे बलिदानो के साथ बहुत बड़ा मज़ाक है. राहुल ने अभी तक एक भी ऐसा उदाहरण पेश नही किया जिसकी बजाह से देश का आम आदमी उन पर गर्व महसूस करे. उन्हे अपना नेता बस कांग्रेस के चाटुकार लोग ही मानते है, आम जनता नही. जान जान का नेता बनने के लिए बलिदान वा समर्पण एक मात्र रास्ता है. ............राहुल को युवा नेतरत्व कि झलक कहने वाले नासमझ क्या भगत सिंह, गणेश शंकर , बिस्मिल असफ़ाक़ एवं उनके साथियो द्वारा किए कार्यो को क्या भूल गये.
क्षमा करो बापू! तुम हमको,
बचन भंग के हम अपराधी,
राजघाट को किया अपावन,
मंज़िल भूले, यात्रा आधी।
जयप्रकाश जी! रखो भरोसा,
टूटे सपनों को जोड़ेंगे।
चिताभस्म की चिंगारी से,
अन्धकार के गढ़ तोड़ेंगे।
क्षमा करो बापू! तुम हमको,
बचन भंग के हम अपराधी,
राजघाट को किया अपावन,
मंज़िल भूले, यात्रा आधी।
जयप्रकाश जी! रखो भरोसा,
टूटे सपनों को जोड़ेंगे।
चिताभस्म की चिंगारी से,
अन्धकार के गढ़ तोड़ेंगे।
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