एक अजीब सा संशय बना हुआ है......लेकिन बादल छ्ट गये है........जिन गाँधी ने विदेश जाकर वकालत की पढ़ाई की....वो गाँधी वकीलो को हिन्दुस्तानं की दुर्दशा का कारण क्यो मान रहे है ? ..................सच भी है....वकालत पेशा नही धर्म है......एक वकील को अपने मुवक्किल की खातिर झूट बोलना पड़ता है. ........वकील का काम जजो के आयेज सच्ची बात रखना है..........सच की तह तक पहुचने मे मदद करना है...................अपराधी को निर्दोष करना उसका काम कभी नही है.
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